योग हमारी संपूर्ण सेहत के लिए अच्छा होता है। योग करने से न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। वहीं आंखों की सेहत को बनाए रखने और रोशनी बढ़ाने में भी योग प्रभावशाली होता है। रोजाना योगाभ्यास से बहुत सारे फायदे मिलते हैं। ऐसे में अगर आपके आंखों की रोशनी भी कम होती जा रही है, तो आपको कुछ योगासन जरूर करना चाहिए। इसलिए आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको कुछ ऐसे योगासन के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आपकी आंखों की सेहत के लिए लाभकारी माना जाता है।
त्रिकोणासन
शरीर के विभिन्न हिस्सों को खींचने और स्ट्रेच करने में यह आसन काफी लाभकारी माना जाता है। त्रिकोणासन को करने से आंखों के आसपास की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। इस आसन को करने के लिए सीधे खड़े होकर दोनों पैरों को चौड़ा फैलाएं। फिर एक पैर को बाहर की तरफ मोड़ें और हाथों को कंधे की ऊंचाई पर फैलाएं। धीरे-धीरे एक हाथ को पैर के पास रखें और दूसरे हाथ को ऊपर की तरफ उठाएं। इस स्थिति में थोड़ी देर रुकें और दूसरी तरफ भी ऐसा करें।
भ्रामरी प्राणायाम
बता दें कि भ्रामरी प्राणायाम एक तरह की श्वास-प्रश्वास प्रक्रिया है। जो मानसिक शांति के अलावा आंखों की सेहत के लिए अच्छा माना जाता है। इसको करने के लिए अपनी आंखें बंद करें और नाक से गहरी सांस लें। फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए भंवरे की तरह की ध्वनि निकालें। इसको करने से आंखों का तनाव कम होता है और आंखों की रोशनी में सुधार होता है।
सर्वांगासन
यह आसन शरीर के सभी अंगों को एक साथ सक्रिय करता है। साथ ही यह आंखों के ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है। इस आसन को करने के लिए पीठ के बल लेट जाएं और पैरों को ऊपर की ओर उठाएं। अब पैरों को ऊपर रखते हुए कंधों का सहारा लें। फिर हाथों को पीठ के नीचे रखें। इस स्थिति में थोड़ी देर रुकें और फिर सामान्य अवस्था में वापस लौट आएं।
सुप्त बधाकोनासन
सुप्त बधाकोनासन आंखों के आसपास के तनाव को कम करता है। इस आसन को करने के लिए पीठ के बल लेट जाएं और फिर दोनों पैरों के तलवे को मिलाकर घुटनों को बाहर की तरफ फैलाएं। हाथों को अपने शरीर के किनारे पर रखें और आराम से लेट जाएं। इस स्थिति में थोड़ी देर रुकें और गहरी सांस लें।
उत्थित त्रिकोणासन
यह आसन आंखों की रोशनी को सुधारने में काफी सहायक होता है। इस आसन को करने के लिए एक पैर को सामने की तरफ और दूसरे पैर को पीछे की तरफ फैलाएं। अब एक हाथ सामने की तरफ सीधा करें और दूसरे दूसरे हाथ को अपनी कमर पर रखें। फिर ध्यान केंद्रित करते हुए हाथ सामने की ओर बढ़ाएं और शरीर को एक ओर झुकाएं। इस स्थिति में थोड़ी देर रुकने के बाद दूसरी ओर से भी ऐसा करें।